बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

माँझी रे


ले चल नैय्या.. माँझी रे !
उस क्षितिज के पास |
अरुणिम आतुर मिलन को..
धरती ..ये आकाश ||

साँझ की बेला है ..
सूरज आज अकेला है |
लहरों का मंथर मिलन..
ये प्रतिबिम्ब अलबेला है ||

ले चल नैय्या ..माँझी रे !
उस क्षितिज के पास |
ओट अवगुंठन नयन निहारें..
मिलन को आतुर आस ||

निशा विकल बाँहें प्रसार ..
श्यामल आंचल चन्द्रतारक डाल |
आतुर आलिंगन को प्रगाढ़ ..
झाँपती सी ब्रहम्हांड झुका भाल ||

झिलमिल उर्मि दर्पण में ..
झाँकती ये मुस्कान ..
विमुग्ध भाव-भीनी सी यौवन लाज 
रास रचाएँगे ज्यों ..
मिलन प्रिय !..मधु से आज ||

ले चल नैय्या.. माँझी रे !
उस क्षितिज के पास ||

__________अलका गुप्ता 'भारती'__

सोमवार, 17 अगस्त 2015

चंद हाईकू -



बढ़ा तू हाथ !
भूल सारे विषाद !
पीछे से हँसी ! 

नन्हीं सी ख़ुशी !
हँसेगा सारा जहाँ !
तेरे साथ ही ! 

जिन्दगी तेरी !
बिताना क्या गमों में !
ढूंढ ले खुशी ! 

कर श्रृंगार !
हृदय गुलाब से !
सहज कर ! 

नियामत है !
तोहफ़ा है जिन्दगी !
है बंदगी भी !

-------अलका गुप्ता -------

गुरुवार, 8 जनवरी 2015

~~~~अभिलाषा~~~~



~~~~अभिलाषा~~~~
~~~~~~~~~~~~~~~
अंघकार विराट...जब.. छा जाए |
मानव हे ! मन जब..घबरा जाए ||
प्रज्वलित शिखा मेरी तुम कर देना |
जलजल तन ये चाहें पिघल जाए ||
अभिलाषा उर में ...बस इतनी ही ..
हर तन-मन प्रकाशित सा दमकाए ||
हो विलग मनहूस अँधेरे....भागें दूर ..
जीवन का हर क्षन रौशन हुलसाए ||
मैं शम्मा हूँ तन्हा ..ही जल जाऊँगी |
जीवन से जला हर तन्हाई जाऊँगी ||
---------------अलका गुप्ता----------------

सोमवार, 5 जनवरी 2015

परमात्मा

ईश ! वही परमपिता परमात्मा..एक है !
आत्मा प्रकृति ..रूप परिवर्तित अनेक है !
स्वामी एक वही सबका..अजर अमर वो..
घट-घट..व्यापी न्यायी उपकारी नेक है !!
----------------‪#‎अलका‬ गुप्ता----------------

बुधवार, 31 दिसंबर 2014

अलविदा ! .....2014........!!!
नव वर्ष की बहुत-बहुत हार्दिक शुभ-कामनाएँ !!!
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नव वर्ष है !
नव संचार सब !
नव गीत हों !
फिर प्रसार ...!
कृपा अपरम्पार ...!
दे ईश साथ ...!
हों दूर विघ्न !
खुलें उन्नति द्वार !
भरे उल्लास !
हर्षित होवें !
धन धन्य से पूर्ण !
ले सद्विचार !
---------‪#‎अलका‬ गुप्ता ----------